तुम शाम बिताने आजाना
This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 30 ; the thirtieth edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton . सागर जैसे नाट्यमंच छोड़ जीवन के प्रपंच नयी आश जगाने आजाना तुम शाम बिताने आजाना रेत कैसे महल करे लहर करे उसे रेत कैसे मिट्टी में मिले ख्वाबो की ये रेत जब हार मानी ही नहीं तो अंतिम कोई हार नहीं अभी नहीं बिखरना हैं तुझे जीत में उभरना हैं हर बार वही पहल करे रेत फिर महल करे बच्चो को अपने ये पाठ सिखाने आजाना तुम शाम बिताने आजाना लहरों का महौल चला गाँठ प्रेम की खोल चला सागर मंथन में था अमृत अब तट पे बस्ता प्यार कहीं पुराना, कहीं नया होता हैं सपना साकार कहीं नया जोड़ा हैं बनता कहीं पुरानों में फुके जान मुश्किल जीवन की हलचल को सागर तट करता आसान मन में पुष्प प्रेम, खिलाने आजाना तुम शाम बिताने आजाना दफ्तर सारा बोझ हुआ घुटना देखो रोज हुआ अब थोड़ा तो हल्का हो ले सूरज ...
Kya baat kahi hai...
ReplyDeleteaastha chulha ho jati hai,
ghar chalati hai
A visit for Haridwar for inspiration?
Faith is so beautiful that makes all things possible....A deep one, Satish.
ReplyDeletedhanywaad RB and panchali ji
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