Posts

Showing posts with the label Blog-a-Ton

प्यार का रंग

Image
This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 44 ; the forty-fourth edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton . मेरा अकेलापन, मेरी खामोशी, मेरा यहाँ भी पीछा नहीं छोड़ती थी, जबकी इन ब्लागर मीटो में हँसी मजाक, गपशप, शोर शराबा सब कुछ था, शायद इसलिए की ये खामोशी मेरे अंदर थी, ऊपरी होती तो साथ छोड़ भी देती। पर इस बार कुछ ऐसा होना था, जो पहले कभी नहीं हुआ, "मैं आपको जानती हूँ, आप अमित हैं! ‘अमित की डायरी’ आप का ही ब्लाग हैं ना"  इन शब्दों ने मुझे झकझोर, मुझे अकेलेपन की नींद से जगाया, मेरी खामोशी तोड़ी। पल्लवी नाम था उसका, कहती थी " You know you're my favorite poet, मैंने आपकी सारी कविताएँ पढी हैं,  आप कितना अच्छा लिखते हैं  ।  " तारीफ़ किसको अच्छी नहीं लगती, मुझे भी अच्छी लगती हैं, पर शब्दों पे मेरा ध्यान बिलकुल न था, अब चाहे आप इसे मेरी बेशर्मी कहें या कुछ और, दिमाग शब्द समझ पाता इस हालत में हम न थे, उस मोहिनी ने मुझे मंत्र मुग्ध कर रखा ...

इस दीपावली, एक दिया और

Image
This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 43 ; the forty-third edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton . The theme for the month is "LIGHT" घर अपने किस कोने में अँधेरा है करे थोड़ा गौर इस दीपावली एक दिया और एक दिया रोटी का जहाँ अँधेरा भूख है व्यवस्था अब तक मूक है पकवानों से अपने, बढ़ाए एक कौर इस दीपावली एक दिया और एक दिया लाठी का जब तक ये पेड़ थे घने, पाला उन्हें आज ठुठ हुए, इन्हें ही काट दिया बूढ़े माँ बाप का, नहीं कोई ठौर इस दीपावली एक दिया और एक दिया दुलार का कोख में न मारे उसके भी सपने, उसके भी हक़ उसकी भी जिंदगी सवाँरे बेटा, बेटी का भेद, न पाला करे हर बच्चा दिया है पूरा मौका दे, दिया ऐसा जले दुनिया में उजाला करे बुराइयाँ पुरानीं हैं लगाएं पूरा जोर इस दीपावली एक दिया और एक दिया किताबो का अँधेरा चाय की दुकान पे मिठाई और पकवान पे आपके पसंदीदा रेस्टुरेंट पे अँधेरा जूठे बर्तनों पे अँधेरा सड़क किनारें ...

माँ, ये रंग होता क्या है ?

Image
This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 42 ; the forty-second edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton . The theme for the month is "COLOR" माँ  पिंकू कहता है, कल होली है वो रंग लाया है लाल हरा पिला नीला  मुझे भी बुलाया है माँ  ये रंग होता क्या है ? ये होली क्या होती है ? मैंने क्यों खेली नहीं अब तक ? माँ, बताओं ना  लाल को लाल क्यों कहते है ? हरे को हरा क्यों ? क्या रंग तरल भी होता है ? और ठोस भी ? बरसात का भी कोई रंग होता है ? रंगीन होती है ओस भी ? माँ, मैंने सुना है हर चीज का रंग होता है तुम्हारा क्या रंग है ? और मेरा क्या ? क्या भईया का भी कोई रंग है ? मुन्ना का भी ? बताओं ना माँ  किस स्वाद में आते है रंग ? मीठे होते है, तीखे  या चटपटे ? माँ बताओं ना  किस स्वाद में आते है रंग ? माँ  क्या रंगों की भी कोई खुश्बू है ?  बताओं न...

खट्टी मीठी नारंगी

Image
This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 41 ; the forty-first edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton . The theme for the month is "SWEET AND SOUR" चार चवन्नी पाई जब सेठ चाल लहराई तब न मिलता न मैं बात करूँ  दुनिया पैरों लात धरू एक रूपये में चार मिले हर नुक्कड़ पे यार मिले  गोली खट्टी मीठी वो स्वादो का संसार मिले खट्टा मीठा स्वाद लिए खट्टी मीठी याद लिए बचपन की वो यारी सब जेबों को प्यारी जब मम्मी ने मना किया  एक अठन्नी देती ना सड़क राह में लोटे थे आंसू मोटे मोटे थे  हाफ नीकर वाले हम थे रूपया कम था वक्त बहुत  नारंगी खिचातानी में बहना संग था सख्त बहुत  जब पैसों का अम्बार  हुआ समय नहीं इस बार हुआ  अब न लडते बहना से  न यारों में हम सेठ बने  पिज्जा बर्गर कोला मैं सब से जा के बोला  चाहे जितने पैसे ले मुझको वो स्वाद चखा दे ...

मांगो वत्स क्या मांगते हो

Image
This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 40 ; the fortieth edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton . The theme for the month is "MAKE A WISH" रात स्वप्न में , प्रभु थे खड़े बोले मांगो वत्स क्या मांगते हो जमीं चाहते हो या आसमां चाहते हो बड़ी गाडी , बड़ा घर , नोटों की गट्ठर या सत्ता सुख कुर्सी से हो कर जो चाहो अभी दे दूँ एक नयी ज़िन्दगी दे दूँ मैंने माँगा तो क्या माँगा एक बेंच पुरानीं सी वो पीछे वाली मेरे स्कूल की चाहिए मुझे वो बचपन के ज़माने दोस्त पुराने मदन के डोसे पे टूटना चेतन का वो टिफिन लूटना अपना टिफिन बचाने में टीचर क्लास सभी को भूले हम मस्त थे खाना खाने में मुझे वो होली चाहिए ओ एन जी सी कॉलोनी चाहिए वो ठंडाई वाली ट्रक वो लड़कपन की सनक एक दुसरे का फाड़ते हम कुर्ता अनिल मेरे दोस्त ये वक़्त क्यों नहीं मुड़ता गुरप्रीत के घर वाला रास्ता मेरा टूयूशन मेर...

थोड़ा खुद को ब्रेक दे

Image
This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 39 ; the thirty-ninth edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton . The theme for the month is "Break" टिक टिक टिक घड़ी के कांटे टिक टिक टिक घड़ी ये काटे दिन में सूरज बनता हू मै रातो को भी चाँद बनू मै दो कौड़ी का काम करू मै हर कौड़ी के नाम मरू मै चल चल के जूता गिस जाए न पल भर को आराम करू मै सुबह से दफ्तर नौकर था मै घर में शौहर बेटा हू कही बाप की ड्यूटी पे मै घोडा बन के दौड़ा हू मशीनी जिंदगी हो गई है पुर्जे मेरे काम करे तो ईनाम मिलेगा ईनाम मिलेगा सिक्के मिलेंगे बेटा पती पिता तभी तक अच्छा हू जब तक सिक्के है बिना पैसो के मै वो बंद घड़ी हू जो दीवारों पे सोभा नहीं देती जब किसीके काम न आती कूड़े कबाड़ में गिनी जाती दुनिया के लिए टिक टिक टिक कब तक घड़ी रहे थोड़ा खुद को ब्रेक दे अब की बासुरी बने कोई फुके फुक तो धुन हो जाऊ नजर न आऊ शरमाऊ मै गाऊ कोई...

प्लेटफार्म नंबर दस वाली महिला

Image
This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 38 ; the thirty-eighth edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton . The theme for the month is "The Woman on Platform Number 10" Photo Courtesy : CHUCKMAN'S PHOTOS नयी लगी थी नौकरी और नौकरी का दिन था पहिला पलेटफार्म नंबर दस पे खड़ी थी एक महिला हावभाव से सयानी कपडों से मार्डन ये महिला हिन्दुस्तानी निचे टाइट जींस ऊपर टॉप अर्थ का अनर्थ न निकालिए आप लोगो ने अपने मतलब से अर्थ निकला किसी ने बाए से किसी ने दाए से धक्का दे डाला ये सकुची सहमीं घबराई जैसे ही डिब्बे में आई शर्म सारी दुनिया की बेशर्म हो गई लोगो ने न जाने कहाँ कहाँ आंखे गड़ाई ये सकुची सहमीं घबराई जैसे ही दफ़्तर आई बॉस ने दिखाई बॉसियत कलिग्स ने हैसियत न जाने कहाँ कहाँ आंखे गड़ाई सूरज नया हो आया था दिन नया लाया था इसबार दुप्पटे से ढकी वही महिला प्लेटफार्म नंबर दस की न टाई न बूट में आई थी ...

शराफत चोला है

Image
This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 36 ; the thirty-fifth edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton . The theme for the month is "and then there were none" अच्छा, बुरा, सही, या गलत ये पाठ पढ़ाए कौन असमंजस में बालक है बैठा दुनिया बैठी मौन किस्से का किस्सा है हर शहर का हिस्सा है रात हुई तो लोगो ने अपना बदन यूँ खोला है दिन में आती काम शराफत चोला है जब तक चेहरा वो जान रहा ये हाड मांस इंसान रहा जब चेहरे की पहचान गई इंसा होना आसान नहीं अंधियारा पाया इसने  तो बदन ये खोला है दिन में आती काम शराफत चोला है असमंजस में बालक है बैठा दुनिया बैठी मौन जहाँ दुनिया थी जागी पहरेदार लकीरों पे तब बिलकुल न पार करे कहता प्यार लकीरों से धर्म कर्म का मर्म बताए न जाऊ पार लकीरों से जब पहरेदार नदारद थे बस वो था लकीर थी और फिर वहाँ कोई न था चोला शराफत, उतारा उसने फिर घर उजाड़े, उजाड़ी बस्तिया...