मंदबुद्धि इंजिनियर
खिलौने तोड़ता था उन्हें जोड़ता था यहीं थी उसकी जिंदगी इन्हीं में कपार(सर) फोड़ता था दराज टुकडों से पटी ना जाने कितनी दुर्घटनाएं घटी लड़का होशियार था बस creativity का शिकार था इंजिनियर बनने की चाह पकड़ीं सही राह भौतिकी में जादूगरी रसायन से बाजीगरी विविध शास्त्रों से खेलने लगा दिन ब दिन नये तार छेड़ने लगा प्रयोग कुछ हो गए सफल कुछ रह गए अफसल कहता समंदर की लहरों पे सपने तैराऊंगा उन्ही से बिजली बनाऊंगा जब उसे आया Swing Type Generator बनाने का Idea प्रोफेसर से बात की उसने उसे H.O.D के पास दिया H.O.D ने समझाया व्यर्थं में ना समय गवाओं किताबे रटो और Marks लाओ कॉलेज को नहीं चाहिए था कोई innovator उनकी मांग थी ज़्यादा मार्क्स वाला मंदबुद्धि Engineer साथियों ने छेडा ये बनेगा मोहन भार्गव स्वदेस का पानी से बिजली बनाएगा भाग्य रोशन करेगा प्रदेश का अभी जख्म नहीं हुए थे heal तभी Semester ने ठोक दी आखिरी कील ख्वाब उम्मीद और ज़ज्बा सब year drop में बह गया Innovation ढह गया बस मंदबुद्धि इंजिनियर र...