Posts

Showing posts with the label व्यंग्य

अठाईस की अमीरी

Image
Photo courtesy: The Hindu योजना अयोग्य की योग्यता देखिए जानता को अठाईस की अमीरी के छलावे है अपने शौक के लिए पैतीस लाख के शौचालय है अठाईस रुपये की अमीरी नहीं जच रही हां मानता हू पहली बार अमीर जो हुए है इतनी आसानी से नहीं पच रही गाड़ी में पेट्रोल नहीं मुह में दाना नहीं मुन्ना मुन्नी की फीस भारी पड़ी पर ऑसू बहाना नहीं सरकार ने आपको अमीर कर दिया है खुद को गरीब बताना नहीं बी पी एल की कम कर दी है लकीर जो अठाईस से कम कमाए वो ही फकीर     बेकार की नाराज़गी फिजूल की  हाय तोबा जो करोडो देश का खायेंगे बिना डकार के पचाएंगे वो ऐसे ही रास्ते पे थोड़ी ना बहाएंगे करोड़ो की गंदगी है मोड़ों पे थोड़े ना शुरू होजाएंगे कम से कम पैतीस लाख का बनवाएंगे शौक से सौचा मिटाएंगे तब जाके बहाएंगे : शशिप्रकाश सैनी 

आग पेट्रोल में लगा के

मैडम जी १० जनपथ की राजशाही से बाहर आइए युवराज बिटिया दामाद को भी लाईए टूरिस्ट न बनाइए दो निवाले एक रात नहीं पूरा हफ्ता बिताइए चार पैसे पसीना बहा कमाइए १ लीटर पेट्रोल गाड़ी में डलवाइए क्या बचता है बताइए गर आपसे सरकारी ठाठ छीन ले राजवंश का राज छीन ले दिल्ली की गर्मी दे मुंबई की बरसात दे बनारस की धूल चेन्नई की उमस फिर जानियेगा आम आदमी कितना बेबस आटा दाल से उलझे या मुन्ना की फीस से सुलझे मन मार के जीता है खून खौल जाता है जब सरकारी मच्छर खून पीता है 3 जी 2 जी देश का है धन जानता का है उन्ही से बतमीजी अब कोयला भी खाइयेगा जी ये भी खूब चाल तेल की खुद बडाईयेगा आग पेट्रोल में लगा के गुहार अपनी ही कटपुतली से लगाइयेगा गरीब के दर्द पे घड़ियाली आसू बहाइएगा : शशिप्रकाश सैनी

न डालो पांचो उंगलिया घी में

न डालो पांचो उंगलिया घी में जब खुलेगी पोल सब डाल देंगी तुम्हे नदी में न डालो पांचो उंगलिया घी में जब उबलेंगी  तो उबल जाओगे उन्हीं में खुशी हो जाएगी खुदखुशी में न डालो पांचो उंगलिया घी में दिल खिलौना, प्यार खिलवाड़ नहीं है आज जीते हो, कल हारोगे इसी में न डालो पांचो उंगलिया घी में जिंदगी सबकी इन्साफ करती है स्वर्ग नर्क होता नहीं कुछ जमीं हिसाब करती है कांटे बोओगे तो कांटे ही मिलेंगे वापसी में न डालो पांचो उंगलिया घी में कोई रोए तो हँसो ना इतना उड़ो ना कल तुम्हारी सिसकिया दब न जाए हँसी में न डालो पांचो उंगलिया घी में आज घी में हो कल कढाई में होगे ज़िंदगी आग देगी जल जाओगे इन्ही में न डालो पांचो उंगलिया घी में गर जानना है क्या मजा है आशिकी में एक से दिल लगाइए खो जाईए उसी में न डालो पांचो उंगलिया घी में : शशिप्रकाश सैनी  //मेरा पहला काव्य संग्रह सामर्थ्य यहाँ Free ebook में उपलब्ध  Click Here //

प्रेम की छन्न पकैया

छन्न पकैया छन्न पकैया, छन्न से अटका दिल प्रेम डगर ऐसी है लल्ला, सबसे तू न मिल छन्न पकैया छन्न पकैया, प्रेम है ऐसा साँचा अब तक तुमको जाँच रही, सोचो कितनो को जांचा छन्न पकैया छन्न पकैया, नाक नक्श सूरत है प्रेम करे अबकी जो भैया, देखे न शिरत है छन्न पकैया छन्न पकैया, प्रेम है महंगा सौदा डिग्री सारी हाथ से छुटी, घर के अरमानो को रौंदा             छन्न पकैया छन्न पकैया, मुह मारे ये दर दर मन की माँगा है नीची सबसे, तन की आग है ऊपर छन्न पकैया छन्न पकैया, छन्न से आई लड़की बरसों की यारी टूटी , आग देखिए भडकी छन्न पकैया छन्न पकैया, छन्न से आई बाइक बटुआ भारी है तेरा जब, लड़की करेगी लाइक छन्न पकैया छन्न पकैया, छन्न से लगा कांटा भुत प्रेम का देखो उतरा , जब पड़ा है चांटा छन्न पकैया छन्न पकैया, प्रेम सच्चा बचपन का प्रेम करो उससे ही ,जो अब तक बच्चा मन का छन्न पकैया छन्न पकैया, मेरा मन भी बच्चा ढूढा रहा हू दर दर देखो, प्यार मिले कब सच्चा छन्न पकैया छन्न पकैया, प्रेम मिले जी ऐसा बाल  झडे झुरियां आए, प्रेम रहे वैसे का वैसा : शशिप्रकाश सैनी...

आधुनिक इश्क

Image
चाँद है चांदनी है  गुल है गुलिस्ता है इक इस दिल से पूछिये  मेरे लिए वो क्या क्या है वो भोर की हवा है दिल-ए-दर्द की दवा है डूबते को तिनका क्या तुम पूरी नाव हो  जेठ की दुपहरी में  ठंडी छाव हो  अब क्या क्या बताए  तुम क्या क्या हो  तुम कस्तूरी की सुगंध  तुम संक्रांति की पतंग  तुम ज़िन्दगी जीने की उमंग इतना भी ज्यादा  झूठ न बुलवाओ  कही हम सच न बतादे  तुम क्या हो  तुम मेरे मोबाइल का बिल हो  तुम घाटेवाली मिल हो तुम पेट्रोल का बड़ा दाम हो तुम महंगाई का पैगाम हो तुम शौपिंग की लिस्ट हो तुम वलेनटाइन का व्यापार हो तुम खाते का उधार हो तुम बड़ा महंगा प्यार हो कितना बताए तुम क्या क्या हो तुम फेसबुक की  वो प्रोफाइल पिक हो जब तक दुझी न खिचाए तब तक बदली न जाए  तुम भावो का आभाव हो  क्या क्या बताए तुम क्या क्या हो  मन की इच्छाओ पे  तन भरी है ये प्रेम की लाचारी है  मै मन से उथला हू  तुम मन से ओछी हो...

मंदबुद्धि इंजिनियर

Image
खिलौने तोड़ता था उन्हें जोड़ता था यहीं थी उसकी जिंदगी इन्हीं में कपार(सर) फोड़ता था दराज टुकडों से पटी ना जाने कितनी दुर्घटनाएं घटी लड़का होशियार था बस creativity का शिकार था इंजिनियर बनने की चाह पकड़ीं सही राह भौतिकी में जादूगरी रसायन से बाजीगरी विविध शास्त्रों से खेलने लगा दिन ब दिन नये तार छेड़ने लगा प्रयोग कुछ हो गए सफल कुछ रह गए अफसल कहता समंदर की लहरों पे सपने तैराऊंगा उन्ही से बिजली बनाऊंगा जब उसे आया Swing Type Generator  बनाने का Idea प्रोफेसर से बात की उसने उसे H.O.D के पास दिया H.O.D ने समझाया व्यर्थं में ना समय गवाओं किताबे रटो और  Marks लाओ कॉलेज को नहीं चाहिए था कोई innovator उनकी मांग थी ज़्यादा मार्क्स वाला मंदबुद्धि Engineer साथियों ने छेडा ये बनेगा मोहन भार्गव स्वदेस का पानी से बिजली बनाएगा भाग्य रोशन करेगा प्रदेश का अभी जख्म नहीं हुए थे heal तभी Semester ने ठोक दी आखिरी कील ख्वाब उम्मीद और ज़ज्बा सब year drop में बह गया Innovation ढह गया बस मंदबुद्धि इंजिनियर र...

छन्न पकैया , मेहनत की हैं रोटी

Image
छन्न पकैया , छन्न पकैया , मेहनत की हैं रोटी, कहने को युवराज हैं, लेकिन बाते छोटी-छोटी ||१|| छन्न पकैया, छन्न पकैया , खूब बड़ी महंगाई कुर्सी पे हाकिम जो बैठा , शुतुरमुर्ग हैं भाई ||२|| छन्न पकैया, छन्न पकैया , आँखों पे हैं चश्मे पुत्र मोह में पुत्री मारे , कितनी घटिया रस्में ||३|| छन्न पकैया, छन्न पकैया , मिलें कंधो से कंधे  छूत अछूत हैं बीती बातें, सब उसके ही बन्दे ||४|| छन्न पकैया, छन्न पकैया, बच्चे खेल न पाते बड्डपन की दीवारों ने हरसू , बाट दिए अहाते ||५|| छन्न पकैया, छन्न पकैया, भट्टी तपता सोना  माँ मेरी घर मेरे आई, रोशन कोना-कोना ||६|| छन्न पकैया, छन्न पकैया, निश्चित बुढ़ापा आना  जोशे जवानी में तुम न, बजुर्गो की हंसीं उड़ना||७|| छन्न पकैया, छन्न पकैया, मस्त कोलावेरी गाना  कानो ने सुना अगर तो , तय होठो पे आना ||८|| छन्न पकैया, छन्न पकैया, जहा दीपिका जाए  छोटा माल्या आगे पीछे, लट्टू होता जाए ||९|| छन्न पकैया, छन्न पकैया, गम ही हिस्से आता चेहरे के सब हाव भाव ह...

इश्क हैं ज़रा सा

Image
ये दिल भी हैं धडकता आंखे भी हैं फड़कती सर पे तेरा नशा हैं चढ़ा सा की इश्क हैं ज़रा सा इश्क की बदली हैं छाई की एक गई तो दुझी आई ढूढने से भी ना मिलेगी मेरे दामन में तन्हाई की ऊपरवाले ने इस तरह से मोहब्बत बरसाई की हो गयी मोहब्बत मेरी परछाई की साया लगता हैं मुझे बदला सा की मुझे इश्क हैं ज़रा सा जो दिल से मिला हो गये उसके न जात देखी न धर्म बाहों में खो गये उसके हाथ पकडे हैं हाथ मोडे गालो पे कईयों के हमने भी निशा छोडे रीत जिंदगी की रीत ये बनाई प्रीत हवाओ में हमने फैलाई जो मीत मिला मनमीत हो गया होठो पे थिरकता गीत हो गया जिंदगी की बस ये कमाई हैं की उसने दी हैं और हमने मोहब्बत बरसाई हैं दिलो में कईयों के हम ने जगह बनाई हैं रगों में नशा इश्क का इस तरह भरा सा की कई बार किया हैं हमने इश्क ज़रा सा : शशिप्रकाश सैनी © 2011 shashiprakash saini,. all rights reserved

राजनीति की प्रयोगशाला

Image
गर आपने दो तीन की ईज्ज़तो पे हाथ आजमाया हो और एक का खून बहाया हो दस का किया हो अपहरण तो आप पास करते हैं राजनीति का पहला चरण गर दो बार किया हैं जेल भ्रमण एक दर्जन आत्माओ को पहुचाने में स्वर्ग आपने की हैं मदद तो आपके लिए हैं नगरसेवक का पद गर कारागार हो दूसरा घर जनता में आपका डर व्यापारी भरते हो सरकार से ज्यादा आपको कर तो विधायक बन विधानसभा में उठाईये स्वर गर kidnaping में हो H.S.C दंगो में किया हो Diploma और भ्रष्टाचार में हो Degree तो इस मंडी में खूब होगी आपकी बिक्री आप सांसद बनेगे शिघ्र ही गर इन खूबियों के साथ साथ चारा खाना आपकी आदतों में सुमार हैं तो C.M बनने के Chance बेशुमार हैं गर आप हैं स्कूल गए ता उम्र ईमानदारी से रहे घर में मिले हो सच्चाई की सीख न डाली हो भ्रष्टाचार को भीख बंदूक तो क्या चाकू से भी रहे हो दूर तो राजनीति में आप का कोई काम नहीं हुजूर एक प्रयोग अब भी हैं जारी खुद ही सोचिये किसकी हैं बारी गर भ्रष्टाचारी वैज्ञानिकों का Formula हो गया सफल जल्द P.M की कुर्सी पे आप देखेंगे बाहुब...

कुछ धड़कने कम है

Image
वो बना गया चालाक इस वक़्त वो व्यवहारिका हैं  ज़ुल्म देख - मुह मोड़ लेता हैं  धड़कना छोड़ देता हैं  इंसानियत मर गयी इसकी सुनता नहीं कोई मेरी सिसकी दिल हैं मेरा दहशत में या खो गया हैं किसी गफलत में ये रोता नहीं अंधेरो में ये सोता है सवेरो में ये बना गया कलयुगी सो इसकी धड़कने रुकी मुझे कर रहा पंगू अब मरे हुए से क्या मै इन्सानियत की भीख मांगू अत्याचार देख ज़ुल्म सह न मै हाथ उठता हूँ न मै चीखता-चिल्लाता हूँ संवेदना में नहीं बहकता हूँ दिल भी कहता मै सोच समझ की धड़कता हूँ अब लगता कुछ धड़कने वाकई कम हैं : शशिप्रकाश सैनी © 2011 shashiprakash saini,. all rights reserved

मै मनचला नहीं

Image
गर खुदा दुआ दे तो यही चाहूँ की मौसम-ऐ-इश्क की हर बहार में फुलू कुछ उसकी हद में तो कुछ तेरी मद में झूमू हर रात एक नयी रात हो और दिन एक नया बसेरा दे मेरी मानो तो यही एक अमृत निकला हैं   मंथन से इसके कुछ बूदे मुझे भी दे ना जन्मो का ना उम्र भर का गर खुदा कुछ देना ही हैं  थो रात भर का बसेरा दे कुछ नया करने की चाह आदमी से क्या-क्या कराती हैं  मुझे तो ये हर रात बरगलाती हैं  बस यही चाह हैं  मोहब्बत एक किराये का घर हो जो मै रोज बदलता रहू  हर कलि मेरे नाम को जाने  हर गली मेरे काम को माने  गर खुदा दुआ देनी हैं  तो बस ये दे गर एक बस छुठे थो दूसरी मिले गर खुदा बुरा माने थो तू मत बुरा माने हज़ार टुकड़ो में दिल किया मैंने दर्द सहता रहा और प्यार बाटता रहा : शशिप्रकाश सैनी © 2011 shashiprakash saini,. all rights reserved

महामहिम hepatitis

Image
घर में बड़ गया tension नहीं रहा अब अपनापन माँ ने दिया ultimatum न करे कोई मुझ पे रहम Marshal law हो गया लागू अबा कहा -कहा मै भागूं माँ ने अस्पताल में दर्ज कराइ F.I.R दफा 420 के तहत शुरू हुआ उपचार दी जाने लगी सब्जियां उबाल कर नमक ऊपर से डाल कर udiliv और livfit  अन्दर करते security बाहर माँ supreme authority बहन ने सभाली गुप्तचर agency हम ने सोचा चलो जान बची मैने उसे धमकाया रिश्वत का लालच दिखया action ने किया reaction उसने हमे धमकाया और रिश्वत भी पाया सालभर से affected हूँ  इन उबली सबज़ियो में कैद हूँ  हुका पानी हैं बंद पर hepatitis नहीं हुआ मंद ए virus के रिश्तेदार ए doctoro के मददगार ए महामहिम hepatitis अब मेरी तो जान छोड़ : शशिप्रकाश सैनी © 2011 shashiprakash saini,. all rights reserved

घर चिडीयाघर हो गया

Image
घर चिडीयाघर हो गया अतिथि आने का ये असर हो गया कोई बन्दर हुआ कोई मगर हो गया ललचता है कोई झपटा है कोई और मेरी आंख में खटकता है कोई ये अतिथि नहीं अभिशाप है क्या ये पूर्व जन्मो के पाप है ये अतिथि आने की व्यथा है क्या टिक जाना इनकी प्रथा है बच्चे है इनके सैतान करते हुडदंग हे इश्वर बंद करो ये व्यंग :शशिप्रकाश सैनी © 2011 shashiprakash saini,. all rights reserved