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एक से दो से हज़ार से

एक से दो से हज़ार से कब तक खेलिएगा एतबार से रातो की रंगीनियां होंगी जलवा होगा बाज़ार में आप भी होगए है कारोबार से बस पल भर की खुशी है वो भी बिकी है क्यों डरते है इतना आप दिलदार से है मानते धोखा हुआ था जब आपने दिल दिया था रूठना था हक तुम्हारा अब छोडिये गुस्सा संसार से छेडिए न जख्म जख्म भर जाएंगे “सैनी” दिल लगाइए फिर देखिए क्या होता है प्यार से : शशिप्रकाश सैनी

इश्क हैं ज़रा सा

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ये दिल भी हैं धडकता आंखे भी हैं फड़कती सर पे तेरा नशा हैं चढ़ा सा की इश्क हैं ज़रा सा इश्क की बदली हैं छाई की एक गई तो दुझी आई ढूढने से भी ना मिलेगी मेरे दामन में तन्हाई की ऊपरवाले ने इस तरह से मोहब्बत बरसाई की हो गयी मोहब्बत मेरी परछाई की साया लगता हैं मुझे बदला सा की मुझे इश्क हैं ज़रा सा जो दिल से मिला हो गये उसके न जात देखी न धर्म बाहों में खो गये उसके हाथ पकडे हैं हाथ मोडे गालो पे कईयों के हमने भी निशा छोडे रीत जिंदगी की रीत ये बनाई प्रीत हवाओ में हमने फैलाई जो मीत मिला मनमीत हो गया होठो पे थिरकता गीत हो गया जिंदगी की बस ये कमाई हैं की उसने दी हैं और हमने मोहब्बत बरसाई हैं दिलो में कईयों के हम ने जगह बनाई हैं रगों में नशा इश्क का इस तरह भरा सा की कई बार किया हैं हमने इश्क ज़रा सा : शशिप्रकाश सैनी © 2011 shashiprakash saini,. all rights reserved

मै मनचला नहीं

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गर खुदा दुआ दे तो यही चाहूँ की मौसम-ऐ-इश्क की हर बहार में फुलू कुछ उसकी हद में तो कुछ तेरी मद में झूमू हर रात एक नयी रात हो और दिन एक नया बसेरा दे मेरी मानो तो यही एक अमृत निकला हैं   मंथन से इसके कुछ बूदे मुझे भी दे ना जन्मो का ना उम्र भर का गर खुदा कुछ देना ही हैं  थो रात भर का बसेरा दे कुछ नया करने की चाह आदमी से क्या-क्या कराती हैं  मुझे तो ये हर रात बरगलाती हैं  बस यही चाह हैं  मोहब्बत एक किराये का घर हो जो मै रोज बदलता रहू  हर कलि मेरे नाम को जाने  हर गली मेरे काम को माने  गर खुदा दुआ देनी हैं  तो बस ये दे गर एक बस छुठे थो दूसरी मिले गर खुदा बुरा माने थो तू मत बुरा माने हज़ार टुकड़ो में दिल किया मैंने दर्द सहता रहा और प्यार बाटता रहा : शशिप्रकाश सैनी © 2011 shashiprakash saini,. all rights reserved