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ये कौन सा लुटेरा

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कितने है लुटेरे ये कौन सा लुटेरा   खाकी मे थानेदार कही खादी मे भ्रष्टाचार कही जेल हो गए होटल से ये आते है जाते है कल जो चारा खाते थे अब कोयला भी खाते है कितने है लुटेरे ये कौन सा लुटेरा     सड़क सड़क कोना कोना ये मांगे हाथ बढ़ा के ऐसे आए वैसे आए बटुए मे पैसे आए गांधी बस नोटो पे भाए और नहीं पच पाए    रक्षक जब हो जाए भक्षक किस से आस लगाए कितने है लुटेरे ये कौन सा लुटेरा     नौकर भी पूरे शाह हुए इतने बेपरवाह हुए     नौकर पूरे सीना ताने मालिक को मालिक न माने मिल गई सारी नदिया ये पाप की देश लूटते ऐसे जैसे संपत्ति बाप की कितने है लुटेरे ये कौन सा लुटेरा     गोदामो मे सड़ रहा अनाज देखिये कल भी छटपटाया था भूख से तड़पता आज देखिये मुक बधिर दिल्ली और दिल्ली का गूंगा सरताज देखिये कितने है लुटेरे ये कौन सा लुटेरा     : शशिप्रकाश सैनी 

धृतराष्ट्र सिंहासन हुआ

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तिहाड़ के कमरों से कैदी जा रहे विदेश अब ओलंपिक भी कराएगा भ्रष्टाचारियों की रेस धृतराष्ट्र सिंहासन हुआ और राजमाता  सवार्थी अर्जुन अन्ना हो गए बाबा हुए है सारथि क्या खूब थानेदार है जानता पे जुर्माना लगे चोर चोरी कर रहे कोई उंगली उठाए ना जो उंगली करे उस पे  ही धारा लगे चोर थानेदार को जनता    से भी प्यारा लगे धृतराष्ट्र सिंहासन हुआ और राजमाता  सवार्थी जज भी वो मुजरिम भी वही इल्जाम  न लगाइए इल्जाम जो लगाइए तो सबूत तगड़े लाइए सबूतों को स्वाहा करे जनता जब भी आह करे सत्ता वाह वाह करे धृतराष्ट्र सिंहासन हुआ और राजमाता  सवार्थी दिल्ली अब सुनती नहीं  मूक बधिर हो गई  उंगलिया कटने लगे  की मुट्ठी में कर लो ताकतें एकता का बल दिखा  अब नयी हलचल दिखा  कान के पर्दे हिले  आवाज़ होनी चाहिए बेहतर कल की कोशिशें आज होनी चाहिए अर्जुन अन्ना हो गए बाबा हुए है सारथि : शशिप्रकाश सैनी

सुधर चुका प्रदेश

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प्रदेश झुलसा धूप मे , प्यासा प्यास मे पंखे बत्तिया मृत, न मेघा आकाश मे  न मेघा आकाश मे , जनता की दुर्गति है  सत्ता के सपनों मे, होंडा मारुति है  जन धन पे  रेवड़िया , क्या किया अखिलेश  पढे लिखे की सोच ये , सुधर चुका प्रदेश  : शशिप्रकाश सैनी 

रानी घमंडी

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photo courtesy: Outlook India उपहार मे सत्ता मिली जमीन की नहीं वो आसमान से उतरी ढोंग ढोंग की देवी कुछ कहते है चंडी कुछ के लिए दुर्गा मुझे तो बस डायन दिखी जब भी ध्यान से देखा वो थी रानी घमंडी जेपी के नरो से कुर्सी ऐसी हिल गयी डायन इतनी घबराई की लोकतन्त्र लील गयी न्यायालय खा गई अखबार सारे पचागाई लोकतन्त्र बेड़ियो मे हवालात जेल मे था ऐसी थी रानी घमंडी आज भी अपरोक्ष आपातकाल है सत्ता कितना भी देश को खा ले जैसे मन करे दबा ले इनके लिए कोई सज़ा नहीं बस मज़ा है क्यूकी ये दल नहीं दलदल है भ्रष्टाचार का महल है डायन के वंसजो से उम्मीद भी क्या रखे जनता के जिस्म मे दाँत गड़ाएंगे बूंद बूंद पी जाएंगे वो थी अब ये है रानी घमंडी : शशिप्रकाश सैनी 

दाग धुले आग मे

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एक नयी लौ है काँग्रेस के चिराग मे सारे दाग जले आग मे किसको क्या मिलना है राख़ मे पाप धूल जाएंगे आग मे ये सोच भी उधार की मुंबई ईकाई ने आग दी मुंबई दिल्ली के बाद जयपुर हैदराबाद इनको बहोत आग लगानी है जब धुआ होगा तो दिखेगा नहीं तो नज़र बचा के फ़ाइले दबानी है अभी तो बहुत आग लगानी है फ़ाइले मन्नू की भी जला रहा है क्या दादा को भी बचा रहा है आग इसलिए लग रही है क्यूकी कुर्सी खिसक रही है एक आग जलने के लिए तुम्हें निगलने के लिए सुलग रही है जनता जग रही है : शशिप्रकाश सैनी

वाह री धर्मनिरपेछता

जालीदार टोपी लगाने से इफ्तार खाने से दाड़ी बड़ाने से लोग धर्मनिरपेछ होने लगे वाह री धर्मनिरपेछता    मौका बेमौका हरा पहने भगवा से भागे मदरसो को रखे आगे धर्म विशेष पढ़ाने मे धन दे तो आप धर्मनिरपेछ होजाएंगे नहीं तो आप कट्टर है कट्टर ही रह जाएंगे वाह री धर्मनिरपेछता शहीद को लानत दे आतंकी के गम मे आसू बहे ओसामा के मरने का दुख हो सीएसटी की स्याह रात भुलजाए कसाब को दामाद बनाए बिरयानी खिलाए तर्क ये या कुतर्क कहे सामाजिक सौहार्द बिगड़ जाएगा जब अफजल  फांसी पे आएगा ऐसे सामाजिक सौहार्द को लानत दे आतंकी पले जिसकी आड़ मे वो सौहार्द जाए भाड़ मे वाह री धर्मनिरपेछता ; शशिप्रकाश सैनी 

राजमाता सत्ता की

http://shashikikavitaye.wordpress.com नाफरमानी रानी से कुछ तो सीखिये दिल्ली की कहानी से जिसे सर झुकना आता नहीं रानी को वो भाता नहीं हुक्म पे तामिल हो मै राजमाता सत्ता की मेरी बात ना हो अनसुनी मै राजमाता सत्ता की जिसको जब चाहे गिरा दू पद पे सारे बिठा दू मै बंदरी और बंदरा दे के सारे हाथों में उस्तरा हुक्म ये चलाइए मन हो जिस तरह इस तरह या उस तरह मेरी भरनी चाहिए जेब चाहे हो जिस तरह हुक्म पे तामिल हो मै राजमाता सत्ता की कितने बड़े खिलाड़ी है कितने चतुर है जनता के दुःख पे आसूं पर सत्ता से रिश्ते मधुर है साथी सत्ता के सबसे चतुर है साथ उनके है और अलग दिखलाना भी है चासनी भी चाटनी है और चिल्लाना भी है : शशिप्रकाश सैनी  You might also like: आग पेट्रोल में लगा के  अठाईस की अमीरी इंसान रहने दो वोटो में न गिनो राजनीति की प्रयोगशाला

अठाईस की अमीरी

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Photo courtesy: The Hindu योजना अयोग्य की योग्यता देखिए जानता को अठाईस की अमीरी के छलावे है अपने शौक के लिए पैतीस लाख के शौचालय है अठाईस रुपये की अमीरी नहीं जच रही हां मानता हू पहली बार अमीर जो हुए है इतनी आसानी से नहीं पच रही गाड़ी में पेट्रोल नहीं मुह में दाना नहीं मुन्ना मुन्नी की फीस भारी पड़ी पर ऑसू बहाना नहीं सरकार ने आपको अमीर कर दिया है खुद को गरीब बताना नहीं बी पी एल की कम कर दी है लकीर जो अठाईस से कम कमाए वो ही फकीर     बेकार की नाराज़गी फिजूल की  हाय तोबा जो करोडो देश का खायेंगे बिना डकार के पचाएंगे वो ऐसे ही रास्ते पे थोड़ी ना बहाएंगे करोड़ो की गंदगी है मोड़ों पे थोड़े ना शुरू होजाएंगे कम से कम पैतीस लाख का बनवाएंगे शौक से सौचा मिटाएंगे तब जाके बहाएंगे : शशिप्रकाश सैनी 

इंसान रहने दो, वोटो में न गिनो

न चोरी, न चकारी, न गुंडई में हूँ महेनत, लगन, शिद्दत, इन्हीं आदतों में हूँ न चोरी, न चकारी, न गुंडई में हूँ दिन रुसवाई, रात तनहाई में हूँ दो वक्त की रोटी के लिए बस खटतारहा हूँ और ईनाम में मिली तोहमतें हैं लोग यहाँ, मुझे बुराइयों में गिनते हैं मेरा घर, मेरी टैक्सी, मेरा ठेला, जला देंगे जब जी में आए, थप्पड़ लगा देंगे नोटों की गट्ठर, अगर होती मेरे सर तो नहीं जलता मेरा घर बिकाऊ हैं भीड़, बिकाऊ हैं पत्थर होनी चाहिए बस, नोटों की गट्ठर कहा से लाए नोटों की गट्ठर की अब तक, मैं ईमान में हूँ खाकी, खादी, बिक चुकी हैं इनकी नज़रों में, मैं इंसान नहीं हूँ क्योंकि आज भी ईमान में हूँ जो दो वक्त की रोटी के लिए पीसता हो दिन रात वो बदले में क्या देगा उसका तो घर ही जलेगा बंधू मित्र आना नहीं यहाँ ये स्वप्न नगरी नहीं छलावा हैं मशीन इतना हुए की न सपने हैं न इच्छा हैं कभी कभी भूल जाते हैं की हम भी जिन्दा हैं जब से इस शहर की राजनीति हुआ हूँ मैं सब सहमति से नोचे हैं दुर्गति हुआ  हूँ मैं मुझे मारना भी वोट हैं पुचकारना भी व...

MaI chalne ke liye bana tha @ UNNAYAN 2012

राजनीति की प्रयोगशाला

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गर आपने दो तीन की ईज्ज़तो पे हाथ आजमाया हो और एक का खून बहाया हो दस का किया हो अपहरण तो आप पास करते हैं राजनीति का पहला चरण गर दो बार किया हैं जेल भ्रमण एक दर्जन आत्माओ को पहुचाने में स्वर्ग आपने की हैं मदद तो आपके लिए हैं नगरसेवक का पद गर कारागार हो दूसरा घर जनता में आपका डर व्यापारी भरते हो सरकार से ज्यादा आपको कर तो विधायक बन विधानसभा में उठाईये स्वर गर kidnaping में हो H.S.C दंगो में किया हो Diploma और भ्रष्टाचार में हो Degree तो इस मंडी में खूब होगी आपकी बिक्री आप सांसद बनेगे शिघ्र ही गर इन खूबियों के साथ साथ चारा खाना आपकी आदतों में सुमार हैं तो C.M बनने के Chance बेशुमार हैं गर आप हैं स्कूल गए ता उम्र ईमानदारी से रहे घर में मिले हो सच्चाई की सीख न डाली हो भ्रष्टाचार को भीख बंदूक तो क्या चाकू से भी रहे हो दूर तो राजनीति में आप का कोई काम नहीं हुजूर एक प्रयोग अब भी हैं जारी खुद ही सोचिये किसकी हैं बारी गर भ्रष्टाचारी वैज्ञानिकों का Formula हो गया सफल जल्द P.M की कुर्सी पे आप देखेंगे बाहुब...