लहू से तरबतर हैं दुनिया



लहू से तरबतर हैं दुनिया

दिल लगाने पे खंजर हैं दुनिया

जब चाहत को चाहना भी हो गुनाह

तो जहन्नुम से बदतर हैं दुनिया

जात समझती हैं जज़्बात नहीं

मोहब्बत के लिए जहर हैं  दुनिया



: शशिप्रकाश सैनी


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