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Monday, December 12, 2016

एक कहानी डरी हुई है

कागज पर सन्नाटा पसरा 
कलम ठिठक कर खड़ी हुई है 
एक कहानी डरी हुई है 


अगले मोड़ पर नया है पन्ना 
नए नए ले किरदारों से 
उसको बिलकुल नया है बनना 
संकोचों से भरी हुई है 
एक कहानी डरी हुई है


पाठक का उत्साह न डूबे 
लिखने है नित नए अजूबे
लिख के पीछे हट जाती है 
पंक्ति पंक्ति कट जाती है 
संदेहों में पड़ी हुई है 
एक कहानी डरी हुई है


सिक्कों की बरसात बुलाए 
लेखक के बटुए तक जाए
सम्मानों का ढेर लगाए 
सोचे हिंदी इंगलिश गाए 
उम्मीदों से दबी हुई है 
एक कहानी डरी हुई है 


#Sainiऊवाच

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Saturday, July 9, 2016

मंतर चाहे जीने वाला


मंतर चाहे जीने वाला 
रात आसव को पीने वाला 
भसम करे जो ढेर से ताने
दर्द हमारे सीने वाला


बड़ी ही काली रातें देखीं 
खू को मेरे अम्ल बनाए
ऐसी तो बरसातें देखी
छोड़ दे मनवा रोना धोना 
ऐसा मैं चाहूँ जादू ढोना


अंतर तक तर तर हो जाऊँ 
ऐसा कोई मंतर चाऊँ
भाग्य का रोड़ा तोड़ सके जो
सुख की नदियाँ मोड़ सके जो
सांसें डर के पार चलाऊँ 
ऐसा कोई मंतर चाऊँ



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Wednesday, January 20, 2016

मैंने कविता पढ़ना छोड़ दिया है


कुछ मेरे भीतर था जिंदा 
जो बचपन जैसा था
एक रात ऐसा डर आया 
खुद से लड़ना छोड़ दिया है 
हाँ! मैंने कविता पढ़ना छोड़ दिया है



सपनों की सच्चाई देखी
देखा टूटें अरमानों को
प्रतिभा के माथे चढ़ चढ़ कर
मन का मढ़ना छोड़ दिया है 
हाँ! मैंने कविता पढ़ना छोड़ दिया है



छोड़ सके तो, छोड़ मैं देता 
कागज कलम सिहाई को
लत अपनी ये तोड़ न पाया 
भाव मैं गढ़ना छोड़ न पाया
पर हाँ! मैंने कविता पढ़ना छोड़ दिया है




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